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Thursday, November 15, 2018

आगे कदम बढ़ाया कर | हिंदी कविता


चल पड़े हो इन रास्तो पे
अब सिर्फ आगे कदम बढ़ाया कर |
चाहे तुफानो से हो मुलाकात
दठ के उनका सामना कर |

अंधेरे हो घने कही
तो भले तू खुद को जलाया कर |
बात हो जो पहेलियों से
सूझबूझ से जवाब दिया कर |

मृगतृष्णा पर पड़ी जो नजर
उनसे मन को तू बहलाया ना कर |
अँधिया अगर घेर ले कभी
हिम्मत से तू मुक़ाबला कर |

चक्रव्यूह में फसा अगर
चालाकी से उसे तोड दिया कर |
मंज़िले भले दिखाई ना दे
तू पीछे मुदा ना कर |

बहुत लंबा है ये सफर 
मगर तू भरोसा कम ना कर |
ख्वाबों में है होंसले बंदे हुए
उनको बोझ समझ के उठाया ना कर |

रखना तू  ख्वाइशे आसमानो को छूने की
खुद को जंजीरो से बंधा ना कर |
पक्षियों के साथ जो उड़ना है
तू थक के ठहरा ना कर |

जब आशा है दुनिया पाने की
तो कश्तियों को सिर्फ किनारो पे रखा ना कर |
चल  निकल पढ़ उन् सुनसान सड़को पे
लोगो की फ़िक्र तू ना कर |

हर मोड़ पर मिलेंगे खुदगर्ज़ तुझे
तू  अपनी मुस्कान गवाया ना कर |
ले सहारा तू भले उस भगवान का
पर कोशिशो को रुकाया ना कर | 

तकलीफे हो बेशुमार
लक्ष्य से अपना ध्यान हटाया ना कर |
जंग है ये तेरी
तू ही पहला कदम उठाया कर | 

चल पड़े हो इन रास्तो पे
अब सिर्फ आगे कदम बढ़ाया कर |
चाहे तुफानो से हो मुलाकात
दठ के उनका सामना कर |

This is my first attempt at Hindi Poem. A friend of mine sent me the below forward and this poem just clicked. ☺️ Inspiration can be found anytime, anywhere when you are looking for it. 



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